अनूप से मेरी मुलाकात कॉलेज (School love story , Hindi story)
2011 का समय था और अब मैं उसने प्यार करने लगी थी, हिम्मत कर के मैनें बोला तो उन्होंने भी हां कर दी अब कॉलेज का दूसरा साल और हम दोनो प्रेमी थे लेकिन ये बात हम दोनो के अलावा कोई भी नही। जनता था, समय बीतता गया पढ़ाई के लिए मैं बाहर गई मेरे पिता के पास पैसे नहीं थे पर उसने बिना सोचे समझे मेरी मदद की और पढ़ाई पूरी कराई मेरी नौकरी लग गई और अब हमारे रिलेशन को 10 साल हो गए उसने बोला अगर इसे आगे बढ़ाना है तो अपने घर पर बात करो मैने जैसे तैसे कर के हां बोला लेकिन घर पर बात नही की, वो बार बार विनम्रता से बोलते और मैं बात टालती रहती, इसी तरह मेरे इंतजार में उन्होंने 4 साल बिताए लेकिन अब उनके घर पर शादी का दबाव बन रहा था , उन्होंने मेरे लिए कई अच्छे रिश्ते ठुकराए लेकिन मैने लापरवाही बरती जैसे तैसे मैने 5 साल बाद अपने पिता के सामने ये बात रखी, तो उन्होंने सीधे मना कर दिया क्यों की हमारी जात अलग थी मैने अपनी मां से बोला मां ने भी माना कर दिया मेरी बहन जिसके सबसे करीब मैं थी उन्होंने भी माना कर दिया इधर लोगो ने माना करना शुरू किया और उधर उनके लिए कई सारे रिश्ते आने लगे, उनके माता पिता काफी बूढ़े थे, और मुझे बेहद पसंद करते थे और यह भी चाहते थे की मैं उनके घर की बहु बन जाऊं ऐसा करते करते 3 साल निकल गए घर पर पापा से कई बार झगड़ा हुआ ये सब जानते हुए की आज उनकी वजह से मैं अपनी जीवन में अच्छा कर रही हूं मेरे माता पिता ने बोला की हम अपने समाज की खातिर तुम्हारा विवाह दूसरी जाति में नही कर सकते हैं मेरे पास अब यही समाज है जब उन्हें ये बात पता चली तो वो मेरे पिता से फोन पर बात किए पहली बार उन्हें बोलाअंकल समाज आपसे बनाता है आप समाज से नही अगर आप को कल कुछ होता है तो सबसे पहले आप के बच्चे साथ देंगे और कोई नही इतना सुनते ही मेरे पिता गुस्सा गए और उन्हें खूब गालियां बकी उनके आखरी शब्द थे ठीक है अंकल प्रणाम उन्होंने अब मुझसे बोलना छोड़ दिया क्यों की सही समय पर मैने अपने रिश्ते के लिए कदम नहीं उठाए और लापरवाही की ये जानते हुए भी की मेरा परिवार जल्दी तैयार नहीं होगा वो अंदर से टूट गए और मेरे परिवार से ज्यादा मुझे दोषी मानने लगे जो बाद में मुझे भी लगा की सही है मेरी शादी का ना होने का कारण मैं खुद हूं उनकी शादी के कुछ समय बाद मेरी शादी भी होती है अपनी जाति के अच्छे पढ़े लिखे लड़के से शादी के कुछ दिन सब ठीक चलता है लेकिन 2 3 महीने बाद मेरे पति बेवजह मुझपार गुस्सा करते अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मुझसे बोलते की अपने घर से पैसा लाओ ना चाहते हुए भी अप्रकृत संबंध बनाते मेरा बेटा होता है बच्चा होने के बाद मैं उनके लिए सिर्फ संबंध बनाने की मशीन थी इससे ज्यादा कुछ नहीं एक दिन खाने में नमक भूल गई तो पहले उन्होंने गाली दी जब मैने बोला बच्चे के सामने ये सब मत बोलिए तो बेल्ट से मुझे मारा मैं गुस्से में अपने घर चली आई जहां पर मेरे पिता ने मुझसे कहा शादी हो गई है तुम दोनों पति पत्नी अपना मसला खुद सुलझाओ मैं अंदर से हिल गई मेरी मां चाहती थी की मैं उस हैवान के पास जाऊं क्यों की समाज के लोग बोल रहे की बेटी घर पर है मैने मां से बोला बिना मेरी सहमति वो संबंध बनाते है वो भी गलत तरीके से मां ने बोला इसमें कुछ गलत नही तुम्हारी जिम्मेदारी है ये वो जो करना चाहे जैसे करना चाहे कर सकते हैं मैं वापस जाति हूं और घरेलू हिंसा। का शिकार होती हूं इस बार मैंने फैसला किया और अलग घर लेके रहने लगी एक नौकरी पकड़ी और अपने बच्चे की देखभाल करने लगी मैने अनूप से संपर्क साधने की कोशिश की तो उन्होंने बोला मेरी जिम्मेदारी मेरी पत्नी है, और वो मुझसे बहुत प्यार करती है उसके पीठ पीछे मै तुमसे कोई संबंध नहीं बना सकता प्लीज अब मुझसे कोई संपर्क मत करना
आज मैं अकेली हूं मेरे पिता ने जिस समाज के लिए मेरी शादी नहीं कराई वो समाज आज हम सब पर हंसता है पिता की बीमारी हो या मेरी समस्या समाज का एक व्यक्ति भी सहायता करने को नही आता और इसी समाज की वजह से मेरे पिता ने 17 साल का रिलेशन तोड़वा दिया जिसमे कुछ गलती मेरी थी और कुछ उनकी
खैर जो भी हो मैंने अपनी गलती से अनूप को बहुत दुखी किया एक निश्छल इंसान जो कभी किसी के लिए बुरा नही चाहा मैने अपने स्वार्थ के लिए उसके साथ बुरा किया
